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राजभवन पहुंचे मंत्री चौबे और अकबर, अटके विधेयकों को अनुमति देने का आग्रह, आरक्षण मुद्दे पर SC जाएगी सरकार - सीएम भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ सरकार के संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे और विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने मंगलवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की. लंबित वित्तीय विधेयकों के जल्द अनुमति देने को लेकर राज्यपाल से चर्चा की गई. हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरक्षण की परिस्थिति को लेकर राज्यपाल को जानकारी दी गई है. जल्द ही 50% आरक्षण की सीमा के आदेश को राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. दोनों मंत्रियों ने राज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट में हेडकाउंट के आधार पर चैलेंज करने की जानकारी दी.

Minister Mohammad Akbar meet governor
राजभवन पहुंचे मंत्री चौबे और अकबर

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Published : Sep 27, 2022, 10:40 PM IST

रायपुर: मंत्री मोहम्मद अकबर और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने मंगलवार को राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की. दोनों मंत्रियों ने अटके विधेयकों को अनुमति देने का आग्रह किया है. मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि "आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का आदेश प्रदेश का ज्वलंत मुद्दा है. राज्यपाल को सारी स्थितियों से अवगत कराया गया है.'' मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि तमिलनाडु में 50% से अधिक आरक्षण हेडकाउंट पूरा नहीं होने की वजह से अटक गया था. यहां हेडकाउंट कर सुप्रीम कोर्ट में केस फाइल किया जाएगा.

राजभवन पहुंचे मंत्री चौबे और अकबर

तमिलनाडु एकलौता ऐसा राज्य, जहां 69 प्रतिशत आरक्षण: मंत्री मोहम्मद अकबर ने यह भी कहा कि ''छत्तीसगढ़ में आरक्षण 32% ST, SC 12% और 14% OBC चलते आ रहा था. लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया है. पूरे देश में तमिलनाडु ही एक ऐसा राज्य है, जहां 69 प्रतिशत आरक्षण है. इस मामले को लेकर भी कर्नाटक सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी. सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह निर्देश है कि 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं हो सकता. कर्नाटक सरकार जब आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हेडकाउंट करवाया जाए और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं. तब उनके द्वारा बढ़ाए गए आरक्षण को अनुमति मिल जाएगी.''

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हेडकाउंट क्वांटिफिएबल डाटा की प्रकिया जारी: मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि ''सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को हेडकाउंट करवाने के लिए 1 साल का समय दिया था. उसके बाद एक साल और समय बढ़ाया गया. लेकिन समयावधि में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी. प्रदेश में हेडकाउंट क्वांटिफिएबल डाटा की प्रकिया चल रही है. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है हम अपना डाटा प्रस्तुत करते हैं. लेकिन इससे पहले ही हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया. इसलिए इस तरह की स्थिति निर्मित हुई है.''

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