पटना: बिहार में हजारों की संख्या में तालाबों की बंदोबस्ती की जाती है. मछुआरों से तालाब बंदोबस्ती के नाम पर राजस्व भी वसूला जाता है. बड़ी संख्या में तालाब ऐसे हैं जिनकी बंदोबस्ती तो होती है, राजस्व भी लिया जाता है. लेकिन, मछुआरों का उसपर कोई अधिकार नहीं होता है. यानी सारा काम कागजों पर ही किया जाता है.
एक तरफ मुख्यमंत्री जल जीवन हरियाली महाभियान के तहत तालाब, पोखर, आहार को अतिक्रमण मुक्त कराने की बात करते हैं. अभियान के तहत प्रदेश के 1,32,000 से अधिक जलस्त्रोतों को जीर्णोद्धार के लिए चिन्हित किया गया है. लेकिन, बिहार के पशु एवं मत्स्य विभाग का कारनामा अलग है.
अधिकार की आस में मछुआरे दे रहे राजस्व
मत्स्यजीवि सहकारी संघ के चैयरमैन की मानें तो विभाग मछुआरों को मछली मारने के लिए तालाब देती है. उनकी बंदोबस्ती कर हर साल करोड़ों का राजस्व लिया जाता है. लेकिन, मछुआरों की मानें तो बड़ी संख्या में तालाब की बंदोबस्ती होती है. लेकिन, विभाग कब्जा दिलाने में फेल है. मछुआरे हर बार राजस्व इसलिए चुकाते हैं, क्योंकि उन्हें आस है कि कभी ना कभी उन्हें कब्जा मिलेगा.