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पटना: महिलाओं में जिउतिया पर्व को लेकर उत्साह, घाटों पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ - संतान के दीर्घायु होने की कामना

बिहार में जिउतिया पर्व काफी प्रसिद्ध पर्व है. ये पर्व अपने पुत्र की सुख समृद्धि के लिए किया जाता है. जिउतिया को लेकर बाजारों में काफी चहल पहल देखी जा रही है.

जिउतिया पर्व की शुरुआत

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Published : Sep 21, 2019, 1:43 PM IST

पटना: बाढ़ के सुप्रसिद्ध अलखनाथ घाट में जिउतिया के नहाए खाए को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है. स्थानीय लोगों की तरफ से श्रृंगार, फल, सामग्री पूजा सामग्री की दुकानें लगाई गई हैं. वहीं, मंदिर प्रशासन की तरफ से शनिवार को प्रसाद और कई तरह की विशेष व्यवस्था की गई है.

महिलाएं नहाए खाए के दिन गंगा स्नान करती हैं. उसके बाद से जिउतिया पर्व का प्रारंभ होता है. हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ जाने के कारण महिलाओं को स्नान करने में काफी दिक्कतें भी हुई.

नहाए खाए को लेकर घाट पर लगा श्रद्धालुओं का तांता

बिहार में काफी प्रसिद्ध है जिउतिया पर्व
बिहार में जिउतिया पर्व काफी प्रसिद्ध पर्व है. ये पर्व अपने पुत्र की सुख समृद्धि के लिए किया जाता है. जिउतिया को लेकर बाजारों में काफी चहल पहल देखी जा रही है. मुख्य रूप से मिठाई और पूजन सामग्री की खरीददारी को लेकर बाजारों में काफी भीड़ उमड़ रही है. बजारों में दिनभर महिलाओं का तांता लगा रहता है.

जनार्दन झा पुजारी

संतान के दीर्घायु होने की कामना
संतान के दीर्घायु होने की कामना को लेकर महिलाएं निर्जला उपवास कर जिउतिया का त्योहार मनाएंगी. इसको लेकर महिलाओं का उत्साह चरम पर है. बता दें कि यह कठिन त्योहारों में एक है. इसमें महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं. पारंपरिक विधि-विधान से पूजा अर्चना कर महिलाएं संतान की सुरक्षा की कामना करती हैं. शनिवार को नहाय खाय के साथ पर्व की शुरुआत हो गयी. इस दौरान मड़वा की रोटी और कई तरह की सब्जियां खाने का प्रावधान है.

जिउतिया पर्व की शुरुआत

अनूठी है व्रत की परंपरा
जिउतिया को लेकर अनूठी परंपरा कायम है. व्रत को लेकर सूर्योदय से पूर्व महिलाएं आठगन करती हैं. इस दौरान मुख्य रूप से दही-चूड़ा सहित मीठे पकवान खाने का प्रावधान है. इसके बाद पर्व की शुरूआत होती है और निर्जला उपवास प्रारंभ होता है. इस दौरान जिमुतवाहन की पूजा की जाती है. महिलाएं ताड़ के फल सहित अन्य सामग्रियों के साथ डाला भरती है. जबकि प्रदोष काल में पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है कि निष्ठापूर्वक त्योहार करने से संतान दीर्घायु होते हैं.

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