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RRB Group D Result 2019 : फूटा छात्रों का गुस्सा, किया रेल चक्का जाम - जहानाबाद

रेलवे ग्रुप डी परीक्षा के रिजल्ट में धांधली के विरोध में छात्रों ने जहानाबाद स्टेशन पर घंटों रेल रोक दिया. छात्रों का कहना है कि जिनको अधिक अंक प्राप्त हुआ है उनका सेलेक्शन ही नहीं हुआ है, जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले लड़कों का सेलेक्शन हो गया है. यह कैसे संभव है?

रेल रोककर विरोध प्रदर्शन करते छात्र

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Published : Mar 9, 2019, 4:34 AM IST

जहानाबाद: रेलवे ग्रुप डी परीक्षा के रिजल्ट को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पटना के बाद अब बिहार के जहानाबाद के अभ्यर्थियों ने रिजल्ट में धांधली का आरोप लगाया है. अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर इंटर सीटी को रोककर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

नाराज अभ्यर्थियों ने ट्रेन को काफी देर तक रोके रखा. इस दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्री पीयूष गोयल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अभ्यर्थियों का कहना है कि रेलवे के परीक्षा में धांधली हुई है. जिनको अधिक अंक प्राप्त हुआ है उनका सेलेक्शन ही नहीं हुआ है, जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले लड़कों का सेलेक्शन हो गया है.

भविष्य में बड़ें आंदोलन की धमकी
छात्रों ने सरकार पर धांधली का आरोप लगाते हुए आरआरबी ग्रुप डी का रिजल्ट फिर से निकालने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार काबिल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. छात्रों ने कहा कि इसपर सरकार अगर जल्द फैसला नहीं लेती है तो आगे और भी उग्र आंदोलन होगा.

कई अभ्यर्थियों को 100 से ज्यादा नंबर मिले
बता दें कि आरआरबी ग्रुप डी का रिजल्ट 4 मार्च को जारी किया गया था. ग्रुप डी की परीक्षा में कई अभ्यर्थियों को 100 में से 101, 102, 126 नंबर मिले हैं. कई अभ्यर्थियों को 100 से ज्यादा दिए गए हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि रेलवे ग्रुप डी भर्ती में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है.

रेल मंत्रालय ने जारी किया प्रेस रिलीज
इसपर रेल मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर अपना पक्ष रखा है. रेलवे भर्ती बोर्ड का कहना है कि लेवल-1 परीक्षा परिणामों के बारे में गलत सूचना फैलाई जा रही है. लेवल-1 परीक्षा परिणामों के लिए परीक्षा परिणाम तैयार करने की कोई नई प्रणाली लागू नहीं की गई.

रेल रोककर प्रदर्शन करते छात्र

19 वर्षों से है यही प्रक्रिया
रेलवे का कहना है कि सामान्यीकरण पर उम्मीदवार के प्राप्तांक परीक्षा पत्र के कुल अंकों से अधिक हो सकते हैं. सामान्यीकरण प्रणाली का परिपालन लगभग 19 वर्षों से यानी वर्ष 2000 से किया जा रहा है.

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