पटना:चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Election Strategist Prashant Kishor) अब कांग्रेस में बड़ी जिम्मेवारी निभाने वाले हैं और इसकी चर्चा पिछले काफी समय से हो रही थी. राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई है. प्रशांत किशोर बिहार में (Prashant Kishor from Bihar) भी काम कर चुके हैं और नीतीश कुमार से उनकी नजदीकी भी रही है. ऐसे तो कई राज्यों में कई दलों के लिए चुनावी रणनीति बना चुके हैं और उन्हें जीत भी दिलवाई है, लेकिन अब कांग्रेस में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं. ऐसे में अहम सवाल है कि अगर वह पार्टी से जुड़ते हैं तो बिहार कांग्रेस पर इसका क्या असर पड़ेगा.
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'पीके' कई दलों के लिए कर चुके काम: बिहार के प्रशांत किशोर बीजेपी, जदयू, आप, तृणमूल से लेकर कई दलों के लिए काम कर चुके हैं. कांग्रेस के लिए भी पहले काम किया है, लेकिन अब कांग्रेस में बड़ी जिम्मेवारी निभाने वाले हैं. पिछले चुनाव में बंगाल में ममता बनर्जी के लिए काम किया था, उससे पहले अरविंद केजरीवाल के लिए भी काम कर चुके हैं. प्रशांत किशोर की सोनिया गांधी के साथ बैठक हुई है. चर्चा है कि 2024 की तैयारी को लेकर बड़ी भूमिका कांग्रेस के लिए निभा सकते हैं. ऐसे उसकी तैयारी काफी समय से प्रशांत किशोर कर रहे थे. प्रशांत किशोर को बिहार कांग्रेस की जिम्मेवारी भी देने की चर्चा है.
कांग्रेसियों की 'पीके' को लेकर दो टूक: बिहार में कांग्रेस अपने अस्तित्व से लड़ाई लड़ रही है. बोचहां में पार्टी को नोटा से भी कम वोट प्राप्त हुए हैं. हालांकि, प्रशांत किशोर को लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता तक फिलहाल खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. लेकिन पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष समीर सिंह का साफ कहना है कि''बिहार की कमान किसी कार्यकर्ता को ही दी जाएगी. प्रशांत किशोर बिहार में कांग्रेस को मजबूती दिलाने में रणनीति जरूर बना सकते हैं, लेकिन उन्हें पार्टी की कमान नहीं दी जा सकती है.''
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा पार्टी की खराब स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की. प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि ''बोचहां में नोटा से कम वोट आना हम सबके लिए चिंतनीय है और संगठन को मजबूत करने के लिए मिल बैठकर ही फैसला लेना होगा. ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी का स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा.''
BJP-RJD की प्रशांत किशोर पर नजर: प्रशांत किशोर को लेकर हो रही चर्चा पर राजद की भी नजर है. राजद के वरिष्ठ नेता उपेंद्र प्रसाद का कहना है कि प्रशांत किशोर रणनीति बना सकते हैं, लेकिन संगठन को मजबूत नहीं कर सकते हैं. बिहार में कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से कमजोर हो चुका है. लोगों का विश्वास अब लालू यादव और तेजस्वी यादव पर है, इसलिए प्रशांत किशोर का बिहार में कोई असर नहीं होने वाला है. वहीं, बीजेपी का भी कहना है कि प्रशांत किशोर पहले भी कई दलों के साथ काम कर चुके हैं चुनावी रणनीति बनाना उनका व्यवसाय है
''प्रशांत किशोर से कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है. जिस पार्टी का जनाधार ही खत्म हो गया हो वो उसके लिए क्या कर सकते हैं. पार्टी का जनाधार कोई एक दिन में बनता नहीं है. हाल के दिनों में जिस तरह से हिंदी प्रदेशों में कांग्रेस का जनाझार खिसका है. उससे हमें नहीं लगता है कि प्रशांत किशोर कुछ कर पाएंगे. लेकिन मैनेजमेंट के तौर पर देखा जाए तो यूपी चुनाव में भी वो कांग्रेस के लिए ही काम कर रहे थे, वहां कांग्रेस का क्या हश्र हुआ था.''-उपेंद्र प्रसाद, राजद नेता
''प्रशांत किशोर काम करते रहते हैं. वो किसी भी राज्य में किसी भी पार्टी के लिए काम करते हैं. कोई भी उनको हायर कर सकता है. उनका अपना व्यापार है. जो भी पार्टी उनको हायर करेगा उसके लिए वो काम करते हैं. लेकिन उस पर राजनीतिक कोई असर हो सकता है ये संभव नहीं है. उनका काम केवल प्रचार प्रसार करना और नारे गढ़ना है. कोई अपनी रणनीति बनाकर जनता की रणनीति पर खरा उतर जाए तो यह संभव नहीं है.''-प्रेम रंजन पटेल, प्रवक्ता, बीजेपी