पटना:नालंदा में जहरीली शराब से मौत(Death Due to Poisonous Liquor) के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दल भी हमलावर हैं. खास बात ये है कि साल 2016 जब बिहार में शराबबंदी कानून (Liquor Prohibition Law in Bihar) लागू करने का फैसला लिया था, तब तमाम राजनीतिक दलों ने विधानमंडल से सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित किया था लेकिन आज शराबबंदी से ज्यादातर पार्टियां संतुष्ट नहीं हैं और इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.
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दरअसल, पिछले कुछ महीनों में जहरीली शराब से मौत का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है. होली त्यौहार के दौरान 3 दर्जन से ज्यादा लोग जहरीली शराब पीकर मौत के मुंह में समा गए थे. एक बार फिर नालंदा में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत के बाद बिहार में शराबबंदी पर सवाल उठने लगे हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) नीतीश कुमार अकेले पड़ गए हैं. सहयोगी बीजेपी, हम और वीआईपी शराबबंदी कानून को लेकर सवाल उठा चुकी है. वहीं विपक्षी खेमे का साथ भी नीतीश को नहीं मिल रहा है. आरजेडी, कांग्रेस और वामदल भी शराबबंदी कानून की समीक्षा की वकालत कर रहे हैं.
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी शराबबंदी कानून को लेकर अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केसों की बढ़ती संख्या को लेकर नाराजगी भी जाहिर की गई थी. बता दें कि नीतीश कुमार शराबबंदी को सफल बनाने के लिए समाज सुधार यात्रा शुरू कर चुके हैं लेकिन संक्रमण बढ़ने के चलते फिलहाल यात्रा को स्थगित रखा गया है.
बीजेपी की ओर से शराबबंदी कानून को लेकर कई बार सवाल खड़े किए गए हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल जहां समीक्षा की वकालत कर चुके हैं, वहीं शराबबंदी के गुजरात मॉडल को लागू करने की वकालत भी की जा रही है. बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि शराबबंदी लागू हुए लंबा अरसा बीत गए, समीक्षा तो होनी चाहिए. जब सभी दल के नेता बैठेंगे तो कुछ ना कुछ समाधान जरूर निकलेगा. वहीं, हम पार्टी तो बीजेपी से भी दो कदम आगे है. प्रदेश प्रवक्ता विजय यादव ने कहा कि शराबबंदी का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है. सरकार को शराब बंदी कानून वापस लेना चाहिए.