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कोरोना पर भारी मां की ममता जीती, बच्चे की चीख सुन कलेजे से लगाया - कोरोना संक्रमित बच्चा

कहते हैं किसी के भी प्यार से मां का प्यार 9 महीना ज्यादा होता है. वह मां जिस भी हालत में हो अपने संतान को तड़पते नहीं देख सकती है. एक बार फिर से कुछ ऐसा ही देखने को मिला दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में. यहां के आइसोलेशन वार्ड में पांच माह का बच्चा कोरोना संक्रमित है. दो दिन तक तो उस बच्चे की मां ने धैर्य दिखाया. मां बाहर उसकी चीख सुनकर रह नहीं पाती थी. तीसरे दिन मां के धैर्य का बांध टूट गया. उसने स्वास्थ्यकर्मियों के लाख मना करने के बावजूद आइसोलेशन वार्ड में घुस गई और अपने बच्चे को दूध पिलाई.

आइसोलेशन वार्ड में मां और बच्चा
आइसोलेशन वार्ड में मां और बच्चा

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Published : Apr 16, 2021, 2:21 PM IST

Updated : Apr 16, 2021, 6:31 PM IST

दरभंगाः कोरोना महामारी ने खून के रिश्तों को भी तार-तार कर दिया है. जान के भय के कारण अपने अपनों को मरता देख कर भाग खड़े हो रहे हैं. वहीं, दरभंगा में एक मां की ममता इस खौफ पर भारी पड़ी है. डीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना पॉजिटिव अपने 5 माह के बच्चे को भूख से बिलखता देख मां का कलेजा फट पड़ा. वह हर डर-भय को पीछे छोड़ आइसोलेशन वार्ड में घुस गई और अपने बच्चे को दूध पिलाने लगी.

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पांच माह का बच्चा संक्रमित
दरअसल, डीएमसीएच के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में सदर प्रखंड के एक गांव का 5 माह का कोरोना संक्रमित बच्चा भर्ती है. बच्चे के मां-बाप कोरोना निगेटिव हैं. दुर्भाग्य से बच्चा कोरोना पॉजिटिव आ गया है. पहले 2 दिनों तक बच्चा कोरोना आइसोलेशन वार्ड में अकेला ही भर्ती रहा. मां को अपने पास न पाकर बच्चा रोता-बिलखता रहा. जब उसे भूख लगती तो वह और तेज चिल्लाने लगता. इधर, वार्ड के बाहर एक शेड में बैठी उसकी मां उसे बिलखता हुआ देखती तो कलेजे पर पत्थर रख लेती.

डीएमसीएच में कोरोना जांच

तीसरे दिन धैर्य ना दिखा सकी मां
आखिरकार तीसरे दिन उसके धैर्य की सीमा टूट गई. वह जान जोखिम में डाल कर आइसोलेशन वार्ड में घुस गई. उसे नर्स और स्वास्थ्य कर्मी रोकते रहे, लेकिन वह नहीं मानी. अपने बच्चे के पास पहुंच कर उसे दूध पिलाने लगी. तब जाकर बच्चा चुप हुआ. इस बीच वहीं तैनात कर्मियों ने उसे बच्चे को लेकर होम आइसोलेशन में जाने की सलाह दी. लेकिन मां नहीं मानी.

डीएमसीएच का आइसोलेशन वार्ड

नहीं ले जाएगी घर
बच्चे की मां ने कहा कि वह बेटे को लेकर घर नहीं जाएगी. अगर बेटे को लेकर घर घर गई तो उसका इलाज कैसे होगा. उसने कहा कि डीएमसीएच से उसका घर काफी दूर है. वहां कोई डॉक्टर इलाज करने नहीं जाएगा. इसलिए जबतक बेटे का कोरोना ठीक नहीं हो जाता है, तबतक वह बच्चे के साथ कोरोना आइसोलेशन वार्ड में ही रहेगी. बेटा ही नहीं रहा तो उसके जिंदा रहने का क्या फायदा.

नहीं ले पा रही थी चैन की सांस
उसने कहा कि उसे अपनी जान जोखिम में डालकर साथ आइसोलेशन वार्ड में रहना मंजूर है. 2 दिनों से बेटा उससे दूर था, तो वह चैन की सांस नहीं ले पा रही थी. अब बेटे को नजर के सामने देखकर उसे संतोष है.

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Last Updated : Apr 16, 2021, 6:31 PM IST

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