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ताज महोत्सव 2025; सूरसदन में गूंजा विरासत का तराना, 'जरदोजी; हमारी धरोहर, हमारी विरासत' - TAJ MAHOTSAV 2025

आगरा विरासत फाउंडेशन की ओर से सूरसदन सभागार में कार्यक्रम का आयोजन.

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : Feb 27, 2025, 12:15 PM IST

Updated : Feb 27, 2025, 12:25 PM IST

आगरा :इंटरनेशनल ताज महोत्सव में जरदोजी कला की जादूगरी को बयां किया गया. आगरा विरासत फाउंडेशन की ओर से बुधवार रात सूरसदन सभागार में “जरदोजी; हमारी धरोहर हमारी विरासत” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बताया गया कि सोने के धागे से बुना गया तानाबाना जब आकार लेता है तो वो संसार का सर्वश्रेष्ठ नूमना जरदोजी ही कहलाता है. जिसका ऋग्वेद की ऋचाओं में जिक्र है.

'जरदोजी; हमारी धरोहर हमारी विरासत' कार्यक्रम का आयोजन (Video credit: ETV Bharat)

जरदोजी कढ़ाई आज भी शाही घरानों की पहली पसंद :आगरा विरासत फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ रंजना बंसल ने जरदोजी का इतिहास, वर्तमान और भविष्य की संभावना पर आधारित “जरदोजी; हमारी धरोहर हमारी विरासत” समारोह के बारे में जानकारी दी. उन्होंने जरदोजी कढ़ाई की आत्मकथा बयां की. इस दौरान कला के नमूने लिए परिधानों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई. उन्होंने कहा कि आगरा में सैंकड़ों परिवार आज भी इस कला को समर्पित हैं और आर्थिक निर्भर भी हैं. ये सनातन काल की कला है. इस कला सिर्फ खाड़ी देशाें तक सीमित नहीं, अपितु विश्व के हर देश तक पहचान बनाने के लिए संकल्पित है. उन्होंने कहा कि आगरा में 15000 शिल्पकारों को विश्वभर में प्रसिद्धि दिलाने के साथ ही ताज से परे की पहचान भी स्थापित करनी है. इसे जादुई कढ़ाई कहते हैं, जो शाही कपड़ों की रौनक बढ़ा देती है. ताज हेरिटेज के फैजान उद्दीन ने बताया कि जरदोजी कढ़ाई आज भी शाही घरानों की पहली पसंद है. यदि किसी को रॉयल लुक चाहिए तो सोने के धागों की ये कारीगरी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.

इनके डिजाइन किए गए शोकेस :इस अवसर पर डॉ रंजना बंसल, अग्रज जैन, फैजानउद्दीन, अलर्क लाल, कीर्ति खंडेलवाल, सुकीर्ति मित्तल, आयुषी और फैजान, रेणुका डांग, पूजन सचदेवा समेत डिजाइनरों ने परिधानों को प्रस्तुत किया. रेशम और रत्नों की कारीगरी भी जरदोजी की कहानी का हिस्सा रही. डिजाइनर कीर्ति खंडेलवाल ने बताया कि साधारण वस्त्र पर जब जर के धागे से कारीगरी उकेरी जाती है तो वो वस्त्र साड़ी, लहंगा, कुर्ता, शेरवानी स्वतः ही कीमती हो जाता है, इसलिए खाड़ी देशाें से लेकर पश्चिमी देशाें के लिए ये कला नायाब रही है.

जरदोजी एक देव कला :इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि वर्तमान में जरदोजी कला का यदि नाम आता है तो इसको अपनी विरासत बनाने वाला एक ही वर्ग स्मृति पटल पर उभरता है, जबकि बहुत कम लोग जानते हैं कि जरदोजी कला देव कला है, जो ऋग्वेद की ऋचाओं में दर्ज है. देव कला को सूरसदन के मंच से विश्व मंच तक फैलाने का कार्य आगरा विरासत फाउंडेशन ने किया है.

जरदोजी कला के इन साधकों का सम्मान :समारोह में जरदोजी कला साधक पद्मश्री रईसउद्दीन को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया. रईसउद्दीन ने कला की दुनिया में तीन लेयर डायमेंशन जरदोजी की कढ़ाई प्रदान की है. इसके अलावा अग्रज, अलर्क लाल, फैजान उद्दीन, घनश्याम गोपाल माथुर को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया.


बता दें कि सूरसदन प्रेक्षागृह में बुधवार रात आयोजित भव्य और दिव्य समारोह का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ बबिता चौहान, डीएम अरविंद मल्लपा बंगारी, मेयर हेमलता दिवाकर, एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, अपर पुलिस आयुक्त संजीव त्यागी ने किया.

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Last Updated : Feb 27, 2025, 12:25 PM IST

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