बेतिया/पटना : एक हाथ में टैब, गले में लटकता QR कोड स्कैनर यही राजू की पहचान थी. राजू बेतिया रेलवे स्टेशन के बाहर डिजिटली भीख मांगने का काम करते थे. मंदबुद्धि होने के नाते लोग उनका खूब ख्याल रखते थे. लेकिन पिछले एक महीने से उनकी तबीयत खराब चल रही थी. कुछ लोगों का कहना है कि उनका ठीक ढंग से इलाज नहीं पाया नहीं तो राजू आज हम सबके बीच में होते.
डिजिटल भिखारी की मौत पर डिजिटली शोक संवेदना : राजू को देश के पहले डिजिटल भिखारी के रूप में भी जाना जाता था. यहां आने वाले लोग राजू से दुआ सलाम जरूर करते थे. यही वजह है कि उनकी मौत की सूचना पाकर सभी लोग ट्वीट करके एक दूसरे को जानकारी दे रहे हैं. खुद बीजेपी नेता मनीष कश्यप ने भी राजू की मौत पर शोक जाहिर किया है. सोशल मीडिया पर राजू के लिए शोक संवेदनाओं की बाढ़ सी आ गई है.
'भगवान आत्मा को शांति दे..' : एक यूजर ने राजू को याद करते हुए लिखा कि ''डिजिटल भिखारी नाम से प्रसिद्ध बेतिया रेलbs स्टेशन पर रहने वाले राजू अब इस दुनिया में नहीं रहे. भगवान उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें'. वहीं एक अन्य यूजर ने बताया कि राजू के मौत की वजह हार्ट अटैक है. उन्हें हार्ट अटैक आया था. राजू को उन्होंने सोशल मीडिया में ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी.
पीएम मोदी और लालू के फैन: वैसे पीएम मोदी और लालू का एक साथ कोई फैन था तो वो राजू ही थे. ये दोनों नेताओं के जबरा फैन थे. बेतिया के डिजिटल भिखारी खुद लालू यादव को पिता मनते थे और उनके दोनों बेटों को अपना भाई. यही वजह है कि एक यूजर ने सांत्वना देते हुए लिखा कि ''राजू खुद को लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव को छोटा भाई मानते थे. राजू के देहांत होने से सभी दुखी हैं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.''