बैतूल। धार्मिक नगरी बैतूल में बरसों पुरानी परंपरा जो कि पिछले चालीस सालों से बंद थी, इस परंपरा को आज की नई पीढ़ी ने फिर से पुनर्जीवित कर दिया और राम नवमी के अवसर पर नगर में नरसिंग भगवान अवतार नारोन्य का जुलूस बड़े ही धूमधाम के साथ निकाला गया, जिसमे सैकड़ों लोग शामिल हुए. दरअसल नगर में होने वाले सभी धार्मिक आयोजनों को लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं. ऐसा ही बरसों पुराना एक आयोजन जो कि रामनवमी की रात को आयोजित किया जाता था, जिसे "नारोन्या" नाम से जाना जाता था, जिसमें एक व्यक्ति को भगवान नरसिंह अवतार में सजाया जाता था और पूरे नगर में दौड़ाया जाता था. इस दौर यह नरसिंह अवतार भीड़ में शामिल लोगों के पीछे दौड़कर उन्हें लात मारता था.
हिरण्यकश्यप को प्राप्त था वरदान
आज के इस आधुनिकता के दौर ने इस तरह के आयोजनों को बहुत पीछे छोड़ दिया है. इस आयोजन को करने के पीछे की वजह जानकर विलास जोशी ने बताया कि''हिरण्यकश्यप का वर्णन पौराणिक कथाओं में मिलता है. जिसमें राजा हिरण्य कश्यप ने कठोर तपस्या से ब्रम्हा जी से वरदान प्राप्त किया था की कोई मानव उसे मार न सके. न ही उसकी मृत्यु दिन में हो न रात में, न घर के भीतर न ही बाहर न आकाश में न धरती पर, न अस्त्र से न शास्त्र से. भगवान के इस वरदान से राजा हिरण कश्यप को घमंड हो गया था और वह प्रजा से भगवान की तरह स्वयं की पूजा करवाता था.''
भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार में किया हिरण्यकश्यप का वध
विलास जोशी जानकार ने बताया कि''राजा हिरण कश्यप अपने पुत्र प्रहलाद से भी नफरत करता था क्योंकि प्रहलाद भगवान विष्णु की पूजा करता था. इसलिए राजा हिरण कश्यप ने प्रहलाद को मारने का आदेश दिया था. जिसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था. तब से ही नरसिंह अवतार को पूजा जाने लगा था.'' इसी कथा को लेकर रामनवमी पर बैतूल बाजार के प्राचीन मंदिर काला मंदिर से नरसिंह अवतार नारोन्या को निकाला जाता था और पूरे नगर में घुमाया जाता था. इस बंद हुए आयोजन को इस राम नवमी पर युवाओं ने पुनर्जीवित किया.
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