पलामूः बुधवार रात के अचानक 11:30 के करीब मनातू प्रखंड विकास पदाधिकारी नक्सल प्रभावित थाना मनातू पहुंचते हैं. प्रखंड विकास पदाधिकारी थानेदार से दो जवान की मांग करने लगते हैं. थाना प्रभारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से जवान के उपयोग के बारे में जानकारी मांगी. लेकिन प्रखंड विकास पदाधिकारी थाना प्रभारी को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए.
जिसके बाद थाना प्रभारी ने पूरे मामले में वरीय पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया. वरीय पुलिस अधिकारियों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से जवानों के उपयोग के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन प्रखंड विकास पदाधिकारी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे थे. वरीय पुलिस अधिकारियों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को बताया कि आप जिस इलाके में तैनात हैं वह अति नक्सल प्रभावित है, अगर सरकारी कार्य है तो पर्याप्त संख्या में जवानों को उपलब्ध करवाया जाएगा. प्रखंड विकास पदाधिकारी को पूरी सुरक्षा दी जाएगी. लेकिन प्रखंड विकास पदाधिकारी जवानों की मांग पर अड़े रहे.
काफी देर तक समझाने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी ने वरीय पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह अपने जिला मुख्यालय जाना चाहते हैं. उनके एक रिश्तेदार ट्रेन से जा रहे हैं जिनसे उन्हें मुलाकात करना है और मनरेगा के एक मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है. मुकदमा को लेकर उन्हें अधिवक्ता से मिलना है. प्रखंड विकास पदाधिकारी की जिद के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने वरीय प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया. वरीय पुलिस अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी को वापस सरकारी आवास भेजा गया. इससे पहले प्रखंड कर्मियों को थाने बुलाया गया था, जिनकी मौजूदगी में प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवास पर छोड़ा गया. यह पूरा मामला पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर मनातू प्रखंड का है. सदर एसडीएम ने बताया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी को अपने रिश्तेदार से मुलाकात करना था, जिसके लिए वह जवानों की मांग कर रहे थे.